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VOL. 6, ISSUE 5 (2021)
समाज में दृष्टि और मूल्य
Authors
Akhilesh Singh bhadoriya, Ritu Singh Parihar
Abstract
भारत की नही अपितु सभी देशों में नैतिक मूल्य गिरे है। हॉ, भारत को हम सुपर नैतिक मानते हैं इसलिए यहाँ गिरावट ज्यादा महसूस होती है। आज देश के विकास में बाधक मुख्य तत्व भ्रष्टाचार, नशाखोरी, अपहरण, बलात्कार, हत्या आदि है। नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का अभाव नैतिक मूल्यों में गिरावट का पहला कारण है। जागरूकता का अभाव ज्ञान के अभाव के कारण है। आज ज्ञान के लिए दृष्टि का ठीक होना आवश्यक है। अर्थात् उत्तम दृष्टि ही नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता के करीब हमें ला सकती है। उत्तम दृष्टि क्या हैं ‘‘मनसा‘‘, ‘‘वाचा‘‘, ‘‘कर्मणा‘‘ का उत्तम ज्ञान। कर्म के अन्तर्गत हिंसा-अहिंसा, चोर-अचोरी, व्यभिचार-अव्यभिचार, भ्रष्टाचार-अभ्रष्टाचार आदि प्रत्ययों का उत्त्म ज्ञान उच्च नैतिकता के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार वचन के अन्तर्गत मिथ्या भाषण-अमिथ्या भाषण, चुगली अचुगली, चापलूसी-अचापलूसी, कटु भाषण, मृदु भाषण आदि कें अंतर की जागरूकता तथा मनसा कें अन्तर्गत लोभ-अलोभ, झूठीधारणा, सत्य धारणा आदि में भेद की जागरूकता के बाद राग, द्वेष एवं हिसा रहित आदर्श कर्मो के प्रति संकल्प, असत्य के स्थान पर सत्य बोलने का संकल्प तथा अविवेकशील बातों के स्थान पर विवेकशील बातों का संकल्प और अशुद्ध जीविका के स्थान पर शुद्ध जीविका को स्थान देकर प्रयत्न, अर्थात् इंन्द्रियों पर संयम और संयम के उपरान्त स्मृति अर्थात् अच्छे-बुरे कर्म के परिणाम से स्मृति के साथ कार्य निष्पादन। इसके उपरान्त ही मनुष्य की चित्त की एकाग्रता अर्थात् समाधि की कल्पना कर सकता है जिससे नैतिक मूल्यों का सफर पूरा कर नैतिक मूल्यों के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
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Pages:8-9
How to cite this article:
Akhilesh Singh bhadoriya, Ritu Singh Parihar "समाज में दृष्टि और मूल्य ". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 6, Issue 5, 2021, Pages 8-9
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