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VOL. 6, ISSUE 4 (2021)
माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण दक्षता तथा कार्य सन्तुष्टि पर उनकी शैक्षिक योग्यता के प्रभाव
Authors
डाॅ. पूनम मदान, रवि कान्त
Abstract
शिक्षा एक सोदे्देश्य प्रक्रिया है। शिक्षा को व्यक्ति तथा समाज की आत्मा माना जाता है। शिक्षा से ही व्यक्ति समाज सभ्यता एवं संस्क़ति का विकास सम्भव है। भारतीय मनीषा के प्रत्येक युग में शिक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है। महादेवी वर्मा ने अपने लेख ‘‘राष्ट्र के मेरूदण्ड’’ में अत्यंत सही बात कही है कि शिक्षा संस्थानांे में राष्ट्र बनता है यह बात स्वीकार करते है कि सुव्यवस्थ्ति एवं सुसंस्कृत सम्पूर्ण विकास के लिए अच्छी शिक्षा परमावश्यक है। यह अत्यंत विचारणीय प्रश्न है कि भारतीय शिक्षा चाहे माध्यमिक माध्यमिक हो या उच्च हो, अध्यापक, उसे कैसे जीवनोपयोगी, जनोपयोगी तथा राष्ट्रोपयोगी बना सके तभी तो शिक्षा राष्ट्र निर्माण के महान उद्देश्य को पूरा कर सकेगी। आज शिक्षा एक समस्यात्मक स्थिति मंे चल रही है। यद्यपि लगता है कि आज हमने अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर ली है, पर यदि निष्कर्षों पर ध्यान दिया जाय तो हमें लज्जित ही होना पड़ता है। इसीलिए भारतीय मनीषियों ने शिक्षक को परमेश्वर से बड़ा माना है श्वेताश्वतरोपनिषद में कहा गया है- ‘‘यस्य देते पराभक्तितर्यथादेवे गुरो‘‘ शिक्षा ग्रहण करने के लिए शिष्य को द्विज कहा जाता है जिसका तात्पर्य है दूसरा जन्म लेना।
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Pages:16-17
How to cite this article:
डाॅ. पूनम मदान, रवि कान्त "माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की शिक्षण दक्षता तथा कार्य सन्तुष्टि पर उनकी शैक्षिक योग्यता के प्रभाव ". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 6, Issue 4, 2021, Pages 16-17
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