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VOL. 6, ISSUE 1 (2021)
रामचरित मानस में मानवीय दृष्टिबोध
Authors
डाॅ. अंशुला मिश्रा
Abstract
गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम के आदर्श को भारत राष्ट्र की एकता के लिए परम तत्व के रूप में प्रदान किया है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम मानव रूप में भी राज, राष्ट्र, धर्म, राजनीति और मानवता की गरिमाओं से भली-भाँति परिचित हैं। तद्नुसार ये बड़ी सर्तकता से मर्यादा का पालन करते हैं। तुलसीदास ने मर्यादा की रक्षा के सूक्ष्म स्थलों का बड़ी सर्तकता से चयन किया है और उनकी मर्यादा को बड़ी सजगता से रखाया है। माता-पिता, गुरू की आज्ञा पालन, मातृ-प्रेम, पति-पत्नी के मध्य उचित संबंध, प्रशासन प्रजा के मध्य मर्यादा सीमा, पारिवारिक पवित्र शालाीनता, जीव मानवता का वर्ग के मध्य मर्यादा आदि-आदि ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर मानसकार की सचेष्ट दृष्टि रही है। इस प्रकार मानस में मानवीय पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय अनेक मर्यादापालन के अपूर्व स्थल हैं, जिनका गोस्वामी जी ने बड़ी सर्तकता व सक्षमता से पालन किया है। जहाँ भी जितना अधिक त्याग है, चतित्र में उतनी ही विशेष उत्कृष्टता दिखाकर मानो गोस्वामी जी ने हमें त्यागमय जीवनयापन की शिक्षा दी है।
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Pages:08-10
How to cite this article:
डाॅ. अंशुला मिश्रा "रामचरित मानस में मानवीय दृष्टिबोध". International Journal of Advanced Education and Research, Vol 6, Issue 1, 2021, Pages 08-10
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